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ramayan 5.1.46: हनुमानजी, मदमस्त शिकारी पक्षी, अनेक पुष्प-सज्जित वृक्ष तथा अन्य पक्षी, स्वच्छ आकाश में बड़ी तेजी से आगे बढ़ने लगे।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.1.46 
स मत्तकोयष्टिभकान् पादपान् पुष्पशालिन:।
उद्वहन्नुरुवेगेन जगाम विमलेऽम्बरे॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी, मदमस्त शिकारी पक्षी, अनेक पुष्प-सज्जित वृक्ष तथा अन्य पक्षी, स्वच्छ आकाश में बड़ी तेजी से आगे बढ़ने लगे।
 
Hanuman, the intoxicated bird of prey and the numerous flower-adorned trees, along with the other birds, began to advance in the clear sky with his great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)