Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.1.4: उस समय बुद्धिमान हनुमान पक्षियों को भयभीत कर रहे थे, अपनी छाती से प्रहार करके वृक्षों को तोड़ रहे थे और बहुत से मृगों (वन पशुओं) को कुचल रहे थे, तथा सिंह के समान पराक्रमी दिख रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.1.4 
द्विजान् वित्रासयन् धीमानुरसा पादपान् हरन्।
मृगांश्च सुबहून् निघ्नन् प्रवृद्ध इव केसरी॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उस समय बुद्धिमान हनुमान पक्षियों को भयभीत कर रहे थे, अपनी छाती से प्रहार करके वृक्षों को तोड़ रहे थे और बहुत से मृगों (वन पशुओं) को कुचल रहे थे, तथा सिंह के समान पराक्रमी दिख रहे थे।
 
At that time, the intelligent Hanuman was frightening the birds, breaking down the trees by striking them with his chest and crushing many deer (forest animals), and was looking as mighty as a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)