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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  5.1.38-39h 
पद्भॺां दृढमवस्थानं कृत्वा स कपिकुञ्जर:।
निकुच्य कर्णौ हनुमानुत्पतिष्यन् महाबल:॥ ३८॥
वानरान् वानरश्रेष्ठ इदं वचनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार ऊपर की ओर छलांग लगाने के लिए तैयार होकर, वानरों में श्रेष्ठ महाबली हनुमान्‌जी ने अपने पैर दृढ़तापूर्वक जमा दिए और कान खड़े करके, वानरों के प्रधान ने अन्य वानरों से इस प्रकार कहा -॥38 1/2॥
 
Thus getting ready to leap upwards, the mighty Hanuman, the best of the apes, planted his feet firmly, and pricking up his ears, the chief of the monkeys spoke to the other monkeys as follows -॥ 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)