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ramayan 5.1.37: उसने अपनी लम्बी यात्रा का जायजा लेने के लिए अपनी आंखें उठाईं और आकाश की ओर देखते हुए अपनी सांस हृदय में ही रोक ली। 37.   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.1.37 
मार्गमालोकयन् दूरादूर्ध्वप्रणिहितेक्षण:।
रुरोध हृदये प्राणानाकाशमवलोकयन्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उसने अपनी लम्बी यात्रा का जायजा लेने के लिए अपनी आंखें उठाईं और आकाश की ओर देखते हुए अपनी सांस हृदय में ही रोक ली। 37.
 
He raised his eyes to survey his long journey and, looking towards the sky, he held his breath in his heart. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)