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श्लोक  5.1.36 
संहृत्य च भुजौ श्रीमांस्तथैव च शिरोधराम्।
तेज: सत्त्वं तथा वीर्यमाविवेश स वीर्यवान्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् तेजस्वी एवं पराक्रमी हनुमान जी ने अपनी भुजाएँ और गर्दन सिकोड़ लीं। उस समय वे तेज, बल और पराक्रम से परिपूर्ण हो गए। 36.
 
Thereafter, the radiant and mighty Hanuman ji shrank his arms and neck. At this time he was filled with brilliance, strength and valour. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)