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ramayan 5.1.212: तत्पश्चात् समुद्र तट पर पहुँचकर उन्होंने एक विशाल पर्वत की चोटी पर स्थित लंका को देखा। यह देखकर वीर वानर अपना मूल रूप खोकर उसी पर्वत पर उतर आए और वहाँ रहने वाले पशु-पक्षियों को कष्ट पहुँचाने लगे।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 212
 
 
श्लोक  5.1.212 
ततस्तु सम्प्राप्य समुद्रतीरं
समीक्ष्य लंकां गिरिवर्यमूर्ध्नि।
कपिस्तु तस्मिन् निपपात पर्वते
विधूय रूपं व्यथयन्मृगद्विजान्॥ २१२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समुद्र तट पर पहुँचकर उन्होंने एक विशाल पर्वत की चोटी पर स्थित लंका को देखा। यह देखकर वीर वानर अपना मूल रूप खोकर उसी पर्वत पर उतर आए और वहाँ रहने वाले पशु-पक्षियों को कष्ट पहुँचाने लगे।
 
Thereafter, reaching the sea shore, from there they saw Lanka situated on the top of a great mountain. Seeing this, the brave monkeys, having lost their original form, descended on the same mountain, troubling the animals and birds living there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)