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ramayan 5.1.211: महान मेघ के समान शरीर वाले महात्मा हनुमान जी केवड़े, लसोड़े और नारियल के वृक्षों से सुशोभित लंब पर्वत के महान समृद्ध शिखर पर कूद पड़े॥211॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  5.1.211 
तत: स लम्बस्य गिरे: समृद्धे
विचित्रकूटे निपपात कूटे।
सकेतकोद्दालकनारिकेले
महाभ्रकूटप्रतिमो महात्मा॥ २११॥
 
 
अनुवाद
महान मेघ के समान शरीर वाले महात्मा हनुमान जी केवड़े, लसोड़े और नारियल के वृक्षों से सुशोभित लंब पर्वत के महान समृद्ध शिखर पर कूद पड़े॥211॥
 
Mahatma Hanuman ji, having a body like a great cloud, jumped on the great prosperous peak of Lamb Parvat decorated with kevada, lasoda and coconut trees. 211॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)