Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.210: हनुमान जी अत्यंत सुंदर थे और अनेक रूप धारण करते थे। वे समुद्र के उस पार पहुँचे, जहाँ दूसरों का पहुँचना असम्भव था, और उन्होंने अपने विशाल शरीर को देखा। फिर अपने कर्तव्य का विचार करके उन्होंने छोटा रूप धारण कर लिया॥210॥ | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चारुनानाविधरूपधारी
परं समासाद्य समुद्रतीरम्।
परैरशक्यं प्रतिपन्नरूप:
समीक्षितात्मा समवेक्षितार्थ:॥ २१०॥
अनुवाद
हनुमान जी अत्यंत सुंदर थे और अनेक रूप धारण करते थे। वे समुद्र के उस पार पहुँचे, जहाँ दूसरों का पहुँचना असम्भव था, और उन्होंने अपने विशाल शरीर को देखा। फिर अपने कर्तव्य का विचार करके उन्होंने छोटा रूप धारण कर लिया॥210॥
Hanuman ji was very beautiful and used to assume many forms. He reached the other shore of the sea, where it was impossible for others to reach, and looked at his huge body. Then after thinking about his duty, he assumed a small form.॥ 210॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥