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ramayan 5.1.207: "ओह! मेरे विशाल शरीर और मेरे प्रचण्ड वेग को देखकर दैत्यों में मेरे प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होगी - वे मेरा रहस्य जानने के लिए उत्सुक हो उठेंगे।" यह विश्वास परम बुद्धिमान हनुमान के मन में दृढ़ हो गया।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  5.1.207 
कायवृद्धिं प्रवेगं च मम दृष्ट्वैव राक्षसा:।
मयि कौतूहलं कुर्युरिति मेने महामति:॥ २०७॥
 
 
अनुवाद
"ओह! मेरे विशाल शरीर और मेरे प्रचण्ड वेग को देखकर दैत्यों में मेरे प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होगी - वे मेरा रहस्य जानने के लिए उत्सुक हो उठेंगे।" यह विश्वास परम बुद्धिमान हनुमान के मन में दृढ़ हो गया।
 
"Oh! On seeing the huge size of my body and my great speed, the demons will become very curious about me - they will become eager to know my secret." This belief became firm in the mind of the extremely intelligent Hanuman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)