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ramayan 5.1.200: हे वानर! तुमने इस विशालकाय जीव को मारकर बहुत ही घोर पाप किया है। अब तुम्हें अपना अभीष्ट कार्य बिना किसी बाधा के पूरा करना होगा।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 200
 
 
श्लोक  5.1.200 
भीममद्य कृतं कर्म महत्सत्त्वं त्वया हतम्।
साधयार्थमभिप्रेतमरिष्टं प्लवतां वर॥ २००॥
 
 
अनुवाद
हे वानर! तुमने इस विशालकाय जीव को मारकर बहुत ही घोर पाप किया है। अब तुम्हें अपना अभीष्ट कार्य बिना किसी बाधा के पूरा करना होगा।
 
O monkey! You have done a very dreadful deed by killing this huge creature. Now you must accomplish your desired task without any hindrance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)