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श्लोक  5.1.20 
तास्तदा सविषैर्दष्टा: कुपितैस्तैर्महाशिला:।
जज्वलु: पावकोद्दीप्ता बिभिदुश्च सहस्रधा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब उन क्रोधित, विषैले सर्पों ने उन विशाल चट्टानों को काटा, तो मानो उनमें आग लग गई हो। उस समय वे सभी हजारों टुकड़ों में टूट गईं।
 
When those angry, poisonous snakes bit those huge rocks, as if they had caught fire. At that time, all of them broke into thousands of pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)