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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 193-194h
 
 
श्लोक  5.1.193-194h 
स ददर्श ततस्तस्या विकृतं सुमहन्मुखम्॥ १९३॥
कायमात्रं च मेधावी मर्माणि च महाकपि:।
 
 
अनुवाद
हनुमान जी ने उसका अत्यंत विशाल और विस्तृत मुख देखा। उन्होंने देखा कि उसका मुख उसके शरीर के आकार के बराबर ही था। उस समय बुद्धिमान महाकाय हनुमान ने सिंहिका के हृदय को अपना लक्ष्य बनाया।
 
Hanuman ji saw his extremely huge and enlarged face. They saw that his face was the same size as his body. At that time, the intelligent great monkey Hanuman made the heart of Sinhika his target.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)