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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 192-193h
 
 
श्लोक  5.1.192-193h 
तस्य सा कायमुद्वीक्ष्य वर्धमानं महाकपे:।
वक्त्रं प्रसारयामास पातालाम्बरसंनिभम्॥ १९२॥
घनराजीव गर्जन्ती वानरं समभिद्रवत्।
 
 
अनुवाद
महाकपि का शरीर बढ़ता देख सिंहनी ने पाताल और आकाश के मध्य भाग तक अपना मुंह खोल दिया और मेघों के समान गर्जना करती हुई उन वीर वानरों की ओर दौड़ी।
 
Seeing the great ape's body growing, the lioness opened her mouth to the extent of the middle part of the underworld and the sky and roaring like a cloud of clouds, she ran towards those brave monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)