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ramayan 5.1.188-189h: यह सोचकर महाबली हनुमान ने इधर-उधर, ऊपर-नीचे देखा। तभी उन्हें समुद्र के पानी से ऊपर एक विशालकाय जीव दिखाई दिया।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 188-189h
 
 
श्लोक  5.1.188-189h 
तिर्यगूर्ध्वमधश्चैव वीक्षमाणस्तदा कपि:॥ १८८॥
ददर्श स महासत्त्वमुत्थितं लवणाम्भसि।
 
 
अनुवाद
यह सोचकर महाबली हनुमान ने इधर-उधर, ऊपर-नीचे देखा। तभी उन्हें समुद्र के पानी से ऊपर एक विशालकाय जीव दिखाई दिया।
 
Thinking this, the great monkey Hanuman looked around, up and down. Then he saw a huge creature rising above the water of the ocean. 188 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)