vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 188-189h
श्लोक
5.1.188-189h
तिर्यगूर्ध्वमधश्चैव वीक्षमाणस्तदा कपि:॥ १८८॥
ददर्श स महासत्त्वमुत्थितं लवणाम्भसि।
अनुवाद
यह सोचकर महाबली हनुमान ने इधर-उधर, ऊपर-नीचे देखा। तभी उन्हें समुद्र के पानी से ऊपर एक विशालकाय जीव दिखाई दिया।
Thinking this, the great monkey Hanuman looked around, up and down. Then he saw a huge creature rising above the water of the ocean. 188 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×