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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 185-186h
श्लोक
5.1.185-186h
अद्य दीर्घस्य कालस्य भविष्याम्यहमाशिता॥ १८५॥
इदं मम महासत्त्वं चिरस्य वशमागतम्।
अनुवाद
‘आज बहुत दिनों के बाद यह विशाल जीव मेरे वश में आया है। इसे खाकर मेरा पेट कई दिनों तक भरा रहेगा।’॥185 1/2॥
‘Today after a long time this huge creature has come under my control. After eating it my stomach will be full for many days.’॥ 185 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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