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ramayan 5.1.182-183h: वे विशाल बादल उनके द्वारा खींचे जा रहे थे और अत्यंत सुन्दर लग रहे थे। वे बार-बार बादल समूहों में प्रवेश कर रहे थे और बाहर निकल रहे थे। उस अवस्था में वे वर्षा ऋतु के चन्द्रमा के समान बादलों में छिपते और प्रकट होते हुए अत्यंत सुन्दर लग रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 182-183h
 
 
श्लोक  5.1.182-183h 
कपिना कृष्यमाणानि महाभ्राणि चकाशिरे।
प्रविशन्नभ्रजालानि निष्पतंश्च पुन: पुन:॥ १८२॥
प्रावृषीन्दुरिवाभाति निष्पतन् प्रविशंस्तदा।
 
 
अनुवाद
वे विशाल बादल उनके द्वारा खींचे जा रहे थे और अत्यंत सुन्दर लग रहे थे। वे बार-बार बादल समूहों में प्रवेश कर रहे थे और बाहर निकल रहे थे। उस अवस्था में वे वर्षा ऋतु के चन्द्रमा के समान बादलों में छिपते और प्रकट होते हुए अत्यंत सुन्दर लग रहे थे।
 
Those big clouds being pulled by them were looking very beautiful. They were repeatedly entering and coming out of the cloud groups. In that state, they were looking very beautiful like the moon during the rainy season, hiding and appearing in the clouds. 182 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)