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ramayan 5.1.18: पर्वत के दबने से पशु-पक्षियों द्वारा उत्पन्न महान कोलाहल से पृथ्वी, उद्यान और सम्पूर्ण दिशाएँ भर गईं ॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.1.18 
स महान् सत्त्वसन्नाद: शैलपीडानिमित्तज:।
पृथिवीं पूरयामास दिशश्चोपवनानि च॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पर्वत के दबने से पशु-पक्षियों द्वारा उत्पन्न महान कोलाहल से पृथ्वी, उद्यान और सम्पूर्ण दिशाएँ भर गईं ॥18॥
 
The great uproar caused by the animals and creatures, caused by the pressing of the mountain, filled the earth, the gardens and all directions. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)