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ramayan 5.1.173: वरुण के निवासस्थान अछूत समुद्र के निकट आकर उसने आकाश में आश्रय लिया और गरुड़ के समान वेग से आगे बढ़ने लगा। 173.   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  5.1.173 
स सागरमनाधृष्यमभ्येत्य वरुणालयम्।
जगामाकाशमाविश्य वेगेन गरुडोपम:॥ १७३॥
 
 
अनुवाद
वरुण के निवासस्थान अछूत समुद्र के निकट आकर उसने आकाश में आश्रय लिया और गरुड़ के समान वेग से आगे बढ़ने लगा। 173.
 
Coming near the untouchable sea, the abode of Varuna, he took shelter in the sky and started moving ahead with the speed of Garuda. 173.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)