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ramayan 5.1.172: हनुमानजी द्वारा किया गया यह तीसरा अत्यंत कठिन कार्य देखकर समस्त प्राणी 'अहं' कहकर उनकी स्तुति करने लगे।172   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  5.1.172 
तत् तृतीयं हनुमतो दृष्ट्वा कर्म सुदुष्करम्।
साधुसाध्विति भूतानि प्रशशंसुस्तदा हरिम्॥ १७२॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी द्वारा किया गया यह तीसरा अत्यंत कठिन कार्य देखकर समस्त प्राणी 'अहं' कहकर उनकी स्तुति करने लगे।172
 
Seeing this third extremely difficult task performed by Hanuman, all beings began to praise him by saying 'Ahmaan'. 172
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)