श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  5.1.171 
अर्थसिद्धॺै हरिश्रेष्ठ गच्छ सौम्य यथासुखम्।
समानय च वैदेहीं राघवेण महात्मना॥ १७१॥
 
 
अनुवाद
कपिश्रेष्ठ! आप प्रभु श्री राम के कार्य सिद्धि के लिए प्रसन्नतापूर्वक जाइए। हे सज्जन! विदेहनंदिनी सीता को महात्मा श्री राम से शीघ्र ही मिलाइए। 171॥
 
Kapishrestha! You go happily for the accomplishment of Lord Shri Ram's work. Gentle! Reunite Videhnandini Sita with Mahatma Shri Ram soon. 171॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd