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ramayan 5.1.17: हनुमानजी द्वारा पर्वत पर दिए गए कष्ट से पीड़ित होकर वहाँ के सभी प्राणी गुफाओं में घुस गए और भयंकर चीखने लगे॥17॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.1.17 
हरिणा पीडॺमानेन पीडॺमानानि सर्वत:।
गुहाविष्टानि सत्त्वानि विनेदुर्विकृतै: स्वरै:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी द्वारा पर्वत पर दिए गए कष्ट से पीड़ित होकर वहाँ के सभी प्राणी गुफाओं में घुस गए और भयंकर चीखने लगे॥17॥
 
Being afflicted by the torment inflicted by Hanuman on the mountain, all the creatures there entered the caves and started screaming inconsolably.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)