Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.1.169: दक्षकुमारी! तुम्हें नमस्कार है। मैं तुम्हारे मुख में प्रवेश कर चुका हूँ। देखो, तुम्हारी मनोकामना भी पूरी हो गई है। अब मैं उस स्थान पर जाऊँगा जहाँ विदेहकुमारी सीता विद्यमान हैं।॥169॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  5.1.169 
प्रविष्टोऽस्मि हि ते वक्त्रं दाक्षायणि नमोऽस्तुते।
गमिष्ये यत्र वैदेही सत्यश्चासीद् वरस्तव॥ १६९॥
 
 
अनुवाद
दक्षकुमारी! तुम्हें नमस्कार है। मैं तुम्हारे मुख में प्रवेश कर चुका हूँ। देखो, तुम्हारी मनोकामना भी पूरी हो गई है। अब मैं उस स्थान पर जाऊँगा जहाँ विदेहकुमारी सीता विद्यमान हैं।॥169॥
 
Dakshakumari! Salutations to you. I have entered your mouth. Look, your wish has also come true. Now I will go to that place where Videhakumari Sita is present.'॥ 169॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)