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ramayan 5.1.165: तत्पश्चात् अग्नि के समान तेजस्वी हनुमान्‌ नब्बे योजन ऊँचे उठे और यह देखकर सुरसा ने भी अपना मुँह सौ योजन तक बड़ा कर लिया ॥165॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  5.1.165 
हनूमाननलप्रख्यो नवतिं योजनोच्छ्रित:।
चकार सुरसा वक्त्रं शतयोजनमायतम्॥ १६५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अग्नि के समान तेजस्वी हनुमान्‌ नब्बे योजन ऊँचे उठे और यह देखकर सुरसा ने भी अपना मुँह सौ योजन तक बड़ा कर लिया ॥165॥
 
Thereafter Hanuman, as radiant as fire, rose ninety yojanas in height. Seeing this Surasā also widened her mouth to a hundred yojanas.*॥ 165॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)