श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 162
 
 
श्लोक  5.1.162 
हनूमांस्तु तत: क्रुद्धस्त्रिंशद् योजनमायत:।
चकार सुरसा वक्त्रं चत्वारिंशत् तथोच्छ्रितम्॥ १६२॥
 
 
अनुवाद
तब हनुमान जी क्रोधित हो गए और उन्होंने अपना शरीर तीस योजन बढ़ा लिया, तब सुरसा ने भी अपना मुख चालीस योजन बढ़ा लिया।
 
Then Hanuman ji became angry and increased the size of his body by thirty yojanas. Then Surasa also raised her mouth by forty yojanas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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