Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.16: फिर जैसे मध्यम ज्वाला वाली अग्नि निरन्तर धुआँ छोड़ती रहती है, उसी प्रकार वह पर्वत अपने-अपने शिलाखंडों सहित बड़ी-बड़ी शिलाएँ गिराने लगा॥16॥ | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुमोच च शिला: शैलो विशाला: समन:शिला:।
मध्यमेनार्चिषा जुष्टो धूमराजीरिवानल:॥ १६॥
अनुवाद
फिर जैसे मध्यम ज्वाला वाली अग्नि निरन्तर धुआँ छोड़ती रहती है, उसी प्रकार वह पर्वत अपने-अपने शिलाखंडों सहित बड़ी-बड़ी शिलाएँ गिराने लगा॥16॥
Moreover, just as a fire with moderate flames continuously emits smoke, in the same manner the mountain began to drop huge rocks along with their mansils.॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥