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ramayan 5.1.156: हनुमान की यह बात सुनकर सुरसा, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी, बोली, 'मुझे वरदान प्राप्त है कि कोई भी मुझे पार नहीं कर सकता।'   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  5.1.156 
एवमुक्ता हनुमता सुरसा कामरूपिणी।
अब्रवीन्नातिवर्तेन्मां कश्चिदेष वरो मम॥ १५६॥
 
 
अनुवाद
हनुमान की यह बात सुनकर सुरसा, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी, बोली, 'मुझे वरदान प्राप्त है कि कोई भी मुझे पार नहीं कर सकता।'
 
Upon hearing Hanuman say this, Surasa, who could take any form at will, said, 'I have been granted a boon that no one can jump over me.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)