श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  5.1.155 
अथवा मैथिलीं दृष्ट्वा रामं चाक्लिष्टकारिणम्।
आगमिष्यामि ते वक्त्रं सत्यं प्रतिशृणोमि ते॥ १५५॥
 
 
अनुवाद
'अथवा (यदि तुम मुझे खाना ही चाहते हो) सीताजी को देखकर और महान् कर्म करने वाले भगवान् रामजी से मिलकर मैं तुम्हारे मुख में प्रवेश करूँगा - यह मैं तुम्हें सच्चे मन से वचन देता हूँ॥155॥
 
"Or (if you really wish to eat me) after having seen Sitaji and having met Lord Rama, the doer of great deeds, I shall then enter your mouth - I promise you this with all sincerity.'॥ 155॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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