श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  5.1.154 
तस्या: सकाशं दूतोऽहं गमिष्ये रामशासनात्।
कर्तुमर्हसि रामस्य साह्यं विषयवासिनि॥ १५४॥
 
 
अनुवाद
मैं श्री रामजी की आज्ञा से उनका दूत बनकर सीताजी के पास जा रहा हूँ। आप भी श्री रामजी के राज्य में रहते हैं। अतः आपको उनकी सहायता करनी चाहिए॥154॥
 
‘I am going to Sitaji as a messenger of Shri Ram by his order. You also live in Shri Ram's kingdom. Therefore, you should help him.॥ 154॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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