श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  5.1.144 
ततो देवा: सगन्धर्वा: सिद्धाश्च परमर्षय:।
अब्रुवन् सूर्यसंकाशां सुरसां नागमातरम्॥ १४४॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं, गन्धर्वों, सिद्धों और महर्षियों ने सूर्य के समान तेजस्वी नागमाता सुरसा से कहा ॥144॥
 
Then the gods, Gandharvas, Siddhas and Maharishis said to Nagamata Surasa, who was as bright as the sun. 144॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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