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ramayan 5.1.141: ये वानरश्रेष्ठ हनुमान दशरथपुत्र श्री राम की सहायता करने जा रहे हैं। आपने अपनी सामर्थ्यानुसार इनका आतिथ्य करके मुझे पूर्ण संतुष्टि प्रदान की है।॥141॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  5.1.141 
रामस्यैष हितायैव याति दाशरथे: कपि:।
सत्क्रियां कुर्वता शक्त्या तोषितोऽस्मि दृढं त्वया॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
ये वानरश्रेष्ठ हनुमान दशरथपुत्र श्री राम की सहायता करने जा रहे हैं। आपने अपनी सामर्थ्यानुसार इनका आतिथ्य करके मुझे पूर्ण संतुष्टि प्रदान की है।॥141॥
 
This best of the monkeys Hanuman is going to help Dasharath's son Shri Ram. You have given me complete satisfaction by hosting him to the best of your ability.'॥ 141॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)