Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.140: ‘सौ योजन समुद्र पार करते समय हनुमान् के मन में कोई भय नहीं था, फिर भी हमारे हृदय में यह भय था कि उनका क्या होगा? उन्हें विश्राम का अवसर देकर आपने उनकी बहुत सहायता की है ॥140॥ | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘सौ योजन समुद्र पार करते समय हनुमान् के मन में कोई भय नहीं था, फिर भी हमारे हृदय में यह भय था कि उनका क्या होगा? उन्हें विश्राम का अवसर देकर आपने उनकी बहुत सहायता की है ॥140॥
‘While crossing the sea of 100 yojanas, there was no fear in the mind of Hanuman, but still there was a fear in our heart that what will happen to him? By giving him an opportunity to rest, you have helped him a lot.॥ 140॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥