Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.1.137: वहाँ आकाश में निवास करने वाले देवता और सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र उस मध्यभाग वाले सुन्दर सुवर्णमय मैनाक पर्वत की क्रिया से अत्यन्त प्रसन्न हुए।।137।।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  5.1.137 
देवताश्चाभवन् हृष्टास्तत्रस्थास्तस्य कर्मणा।
काञ्चनस्य सुनाभस्य सहस्राक्षश्च वासव:॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ आकाश में निवास करने वाले देवता और सहस्र नेत्रों वाले इन्द्र उस मध्यभाग वाले सुन्दर सुवर्णमय मैनाक पर्वत की क्रिया से अत्यन्त प्रसन्न हुए।।137।।
 
The gods residing there in the sky and the thousand-eyed Indra were very pleased with the action of that beautiful golden Mainak mountain with a central part. 137.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)