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ramayan 5.1.134: फिर पर्वतों और समुद्र को छोड़कर, उनसे ऊपर उठकर और अपने पिता के मार्ग का अनुसरण करते हुए, हनुमान जी निर्मल आकाश में चलने लगे।।134।।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.1.134 
अथोर्ध्वं दूरमागत्य हित्वा शैलमहार्णवौ।
पितु: पन्थानमासाद्य जगाम विमलेऽम्बरे॥ १३४॥
 
 
अनुवाद
फिर पर्वतों और समुद्र को छोड़कर, उनसे ऊपर उठकर और अपने पिता के मार्ग का अनुसरण करते हुए, हनुमान जी निर्मल आकाश में चलने लगे।।134।।
 
Then leaving the mountains and the ocean, rising above them and following his father's path, Hanuman ji started walking in the clear sky. 134.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)