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ramayan 5.1.133: उस समय पर्वत और समुद्र दोनों ने बड़े आदर से उसकी ओर देखा, उसका आदर किया और उचित आशीर्वाद देकर उसका अभिवादन किया ॥133॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  5.1.133 
स पर्वतसमुद्राभ्यां बहुमानादवेक्षित:।
पूजितश्चोपपन्नाभिराशीर्भिरभिनन्दित:॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
उस समय पर्वत और समुद्र दोनों ने बड़े आदर से उसकी ओर देखा, उसका आदर किया और उचित आशीर्वाद देकर उसका अभिवादन किया ॥133॥
 
At that time both the mountain and the ocean looked at him with great respect, honoured him and greeted him with appropriate blessings. ॥133॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)