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ramayan 5.1.13: वृक्षों से गिरते हुए सुगन्धित पुष्पों से सब ओर आच्छादित वह पर्वत ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह केवल पुष्पों से ही बना हो ॥13॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.1.13 
तेन पादपमुक्तेन पुष्पौघेण सुगन्धिना।
सर्वत: संवृत: शैलो बभौ पुष्पमयो यथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वृक्षों से गिरते हुए सुगन्धित पुष्पों से सब ओर आच्छादित वह पर्वत ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह केवल पुष्पों से ही बना हो ॥13॥
 
Covered on all sides by the fragrant flowers falling from the trees, that mountain looked as if it were made of flowers alone. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)