Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.122: 'पिताजी! यह पूर्वकाल के सतयुग की बात है। उस काल में पर्वतों के भी पंख होते थे। वे भी गरुड़ के समान वेग से चारों दिशाओं में उड़ते थे।' 122 | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'पिताजी! यह पूर्वकाल के सतयुग की बात है। उस काल में पर्वतों के भी पंख होते थे। वे भी गरुड़ के समान वेग से चारों दिशाओं में उड़ते थे।' 122
‘Father! This is about the Satya Yuga of the past. In those days even mountains had wings. They too used to fly in all directions being as swift as Garuda. 122.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥