Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.12: हनुमानजी ने ज्यों ही पर्वत को दबाया, वह हिलने लगा और दो घड़ी तक हिलता रहा। उस पर जो वृक्ष उगे थे, उनकी शाखाओं पर फूल लगे थे; परन्तु जब पर्वत हिला, तो वे सब फूल झड़ गए॥12॥ | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स चचालाचलश्चाशु मुहूर्तं कपिपीडित:।
तरूणां पुष्पिताग्राणां सर्वं पुष्पमशातयत्॥ १२॥
अनुवाद
हनुमानजी ने ज्यों ही पर्वत को दबाया, वह हिलने लगा और दो घड़ी तक हिलता रहा। उस पर जो वृक्ष उगे थे, उनकी शाखाओं पर फूल लगे थे; परन्तु जब पर्वत हिला, तो वे सब फूल झड़ गए॥12॥
As soon as Hanuman pressed down on the mountain, it started shaking and kept shaking for two hours. The trees that grew on it had flowers on their branches; but when the mountain shook, all those flowers fell off.॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥