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ramayan 5.1.117: हे वानर! हमारा भी आपसे कुछ सम्बन्ध है। आप महान गुणों के संग्रहकर्ता हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  5.1.117 
अस्माकमपि सम्बन्ध: कपिमुख्य त्वयास्ति वै।
प्रख्यातस्त्रिषु लोकेषु महागुणपरिग्रह:॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
हे वानर! हमारा भी आपसे कुछ सम्बन्ध है। आप महान गुणों के संग्रहकर्ता हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।
 
O monkey! We too have some relation with you. You are a collector of great virtues and are famous in all the three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)