Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.1.114-115: समुद्र ने बड़े आदरपूर्वक मुझे आपके स्वागत के लिए नियुक्त किया है और कहा है कि, ‘यह वानररूपी हनुमान सौ योजन की यात्रा करने के लिए आकाश में कूदा है, अतः इसे आपके शिखरों पर कुछ देर विश्राम करने दीजिए, फिर यह शेष दूरी को कूदकर पार कर जाएगा।’॥114-115॥ | ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समुद्र ने बड़े आदरपूर्वक मुझे आपके स्वागत के लिए नियुक्त किया है और कहा है कि, ‘यह वानररूपी हनुमान सौ योजन की यात्रा करने के लिए आकाश में कूदा है, अतः इसे आपके शिखरों पर कुछ देर विश्राम करने दीजिए, फिर यह शेष दूरी को कूदकर पार कर जाएगा।’॥114-115॥
‘The ocean has very respectfully appointed me to welcome you and has said, ‘This monkey-like Hanuman has jumped into the sky to travel a hundred yojanas, so let him rest for a while on your peaks and then he will jump over the remaining distance.’॥ 114-115॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥