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ramayan 5.1.112-113h: श्री रघुनाथजी के पूर्वजों ने समुद्र का आकार बढ़ाया था। इस समय तुम उनका हित करने में लगे हुए हो; इसलिए समुद्र तुम्हारा स्वागत करना चाहता है॥112 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 112-113h
 
 
श्लोक  5.1.112-113h 
राघवस्य कुले जातैरुदधि: परिवर्धित:॥ ११२॥
स त्वां रामहिते युक्तं प्रत्यर्चयति सागर:।
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के पूर्वजों ने समुद्र का आकार बढ़ाया था। इस समय तुम उनका हित करने में लगे हुए हो; इसलिए समुद्र तुम्हारा स्वागत करना चाहता है॥112 1/2॥
 
‘The ancestors of Shri Raghunath had increased the size of the ocean. At present you are engaged in doing good to them; therefore the ocean wishes to welcome you.॥ 112 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)