Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.1.111-112h: हे वानर-शिरोमणि! तुमने यह कठिन कार्य कर लिया है। अब नीचे उतरकर मेरी इन चोटियों पर आराम से विश्राम करो, फिर आगे बढ़ सकोगे।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 111-112h
 
 
श्लोक  5.1.111-112h 
दुष्करं कृतवान् कर्म त्वमिदं वानरोत्तम॥ १११॥
निपत्य मम शृङ्गेषु सुखं विश्रम्य गम्यताम्।
 
 
अनुवाद
हे वानर-शिरोमणि! तुमने यह कठिन कार्य कर लिया है। अब नीचे उतरकर मेरी इन चोटियों पर आराम से विश्राम करो, फिर आगे बढ़ सकोगे।
 
O monkey-head! You have done this difficult task. Now come down and rest comfortably on these peaks of mine, then you can proceed further. 111 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)