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ramayan 5.1.11: समुद्र पार करने की इच्छा से उन्होंने अपना शरीर बहुत बड़ा कर लिया और अपनी भुजाओं और पैरों से पर्वत को दबा दिया ॥11॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.1.11 
निष्प्रमाणशरीर: सँल्लिलङ्घयिषुरर्णवम्।
बाहुभ्यां पीडयामास चरणाभ्यां च पर्वतम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
समुद्र पार करने की इच्छा से उन्होंने अपना शरीर बहुत बड़ा कर लिया और अपनी भुजाओं और पैरों से पर्वत को दबा दिया ॥11॥
 
Desiring to cross the ocean, He enlarged His body immensely and pressed down the mountain with His arms and feet. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)