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ramayan 5.1.103: समुद्र की अनुमति पाकर जल में छिपे उस विशाल पर्वत ने दो ही क्षणों में हनुमान को अपनी चोटियाँ दिखा दीं।   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.1.103 
स महात्मा मुहूर्तेन पर्वत: सलिलावृत:।
दर्शयामास शृङ्गाणि सागरेण नियोजित:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
समुद्र की अनुमति पाकर जल में छिपे उस विशाल पर्वत ने दो ही क्षणों में हनुमान को अपनी चोटियाँ दिखा दीं।
 
Upon receiving the permission of the ocean, that huge mountain that was hidden in the water showed its peaks to Hanuman in just two moments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)