vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 103
श्लोक
5.1.103
स महात्मा मुहूर्तेन पर्वत: सलिलावृत:।
दर्शयामास शृङ्गाणि सागरेण नियोजित:॥ १०३॥
अनुवाद
समुद्र की अनुमति पाकर जल में छिपे उस विशाल पर्वत ने दो ही क्षणों में हनुमान को अपनी चोटियाँ दिखा दीं।
Upon receiving the permission of the ocean, that huge mountain that was hidden in the water showed its peaks to Hanuman in just two moments.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd