श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.1.10 
प्लवगप्रवरैर्दृष्ट: प्लवने कृतनिश्चय:।
ववृधे रामवृद्धॺर्थं समुद्र इव पर्वसु॥ १०॥
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े वानरों ने देखा कि जैसे पूर्णिमा के दिन समुद्र में ज्वार आने लगता है, उसी प्रकार समुद्र लांघने का मन बना चुके हनुमान्‌जी भगवान् राम का कार्य सिद्ध करने के लिए आगे बढ़ने लगे॥ 10॥
 
The big monkeys saw that just as the tide begins to come in the ocean on the full moon day, in the same way Hanuman, who had made up his mind to cross the ocean, started moving ahead to accomplish Lord Rama's task.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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