श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 9: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.9.18 
नर्दतामसुराणां च ध्वनिर्मे श्रोत्रमागत:।
न रतस्य च संग्रामे क्रोशतोऽपि स्वनो गुरो:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'इस बीच, राक्षसों की गर्जना की आवाज़ भी मेरे कानों में पड़ी। युद्ध में लगे मेरे बड़े भाई भी दहाड़ रहे थे, लेकिन मैं उनकी आवाज़ नहीं सुन सका।
 
‘Meanwhile, the roaring sound of the demons also reached my ears. My elder brothers engaged in the war were also roaring, but I could not hear their voices.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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