श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 9: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.9.13 
इह तिष्ठाद्य सुग्रीव बिलद्वारि समाहित:।
यावदत्र प्रविश्याहं निहन्मि समरे रिपुम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव! जब तक मैं इस छिद्र में प्रवेश करके युद्ध में शत्रुओं का संहार न करूँ, तब तक तुम इसके द्वार पर सावधान होकर खड़े रहो॥13॥
 
Sugreeva! Till the time I enter this hole and kill the enemy in the battle, you stand cautiously at its door.'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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