श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 9: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.9.10 
तस्मिन् द्रवति संत्रस्ते ह्यावां द्रुततरं गतौ।
प्रकाशोऽपि कृतो मार्गश्चन्द्रेणोद‍्गच्छता तदा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जब वह भयभीत होकर भागा, तब हम दोनों भाइयों ने उसका बहुत वेग से पीछा किया। उस समय जो चन्द्रमा उदय हुआ था, उसने भी हमारा मार्ग प्रकाशित कर दिया॥10॥
 
When he fled in fear, both of us brothers chased him very fast. The moon which had risen at that time also illuminated our path.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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