श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.7.8 
बाष्पमापतितं धैर्यान्निग्रहीतुं त्वमर्हसि।
मर्यादां सत्त्वयुक्तानां धृतिं नोत्स्रष्टुमर्हसि॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'तुम धैर्य रखो और इन गिरते हुए आँसुओं को रोको। सात्विक पुरुषों की मर्यादा और धैर्य को मत त्यागो।॥8॥
 
‘You should be patient and stop these falling tears. Do not abandon the dignity and patience of Sattvik men.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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