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ramayan 4.7.6: मैंने भी अपनी पत्नी के वियोग में बहुत दुःख उठाया है, परंतु मैं इस प्रकार शोक नहीं करता, न धैर्य खोता हूँ॥6॥   |   ramayan सर्ग 4.7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.7.6 
मयापि व्यसनं प्राप्तं भार्याविरहजं महत्।
नाहमेवं हि शोचामि धैर्यं न च परित्यजे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैंने भी अपनी पत्नी के वियोग में बहुत दुःख उठाया है, परंतु मैं इस प्रकार शोक नहीं करता, न धैर्य खोता हूँ॥6॥
 
I too have suffered a great deal because of the separation from my wife, but I do not grieve in this manner, nor do I lose patience.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)