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श्लोक 4.7.25  |
महानुभावस्य वचो निशम्य
हरिर्नृपाणामधिपस्य तस्य।
कृतं स मेने हरिवीरमुख्य-
स्तदा च कार्यं हृदयेन विद्वान्॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| राजाओं के राजा महाराज श्री रघुनाथजी के वचन सुनकर, उस समय वानर योद्धाओं में प्रधान विद्वान सुग्रीव ने अपना कार्य पूरा हुआ समझा। |
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| Upon listening to the words of King of Kings Maharaja Sri Raghunathji, Sugreeva, the chief scholar among the warriors of the monkeys, at that time considered his task accomplished. 25. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे सप्तम: सर्ग: ॥ ७ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें सातवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ॥ |
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